India History in Olympics 100 Years Indian Olympic Athletes Medals Tokyo Games News Updates | भारत का ओलिंपिक में 100 साल का सफर पूरा, इन 5 बड़ी कामयाबियों ने भारतीय खेल को बदला

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India History in Olympics 100 Years Indian Olympic Athletes Medals Tokyo Games News Updates | भारत का ओलिंपिक में 100 साल का सफर पूरा, इन 5 बड़ी कामयाबियों ने भारतीय खेल को बदला


  • भारत ने 1920 के एंटवर्प (बेल्जियम) ओलिंपिक में पहली बार 6 सदस्यीय आधिकारिक टीम भेजी थी
  • तब से भारत ने 23 ओलिंपिक में सिर्फ 26 मेडल जीते; इसमें 9 गोल्ड, 5 सिल्वर और 12 ब्रॉन्ज शामिल

दैनिक भास्कर

Jun 23, 2020, 12:44 PM IST

आज 73वां अंतरराष्ट्रीय ओलिंपिक दिवस मनाया जा रहा है। इसकी शुरुआत 23 जून 1948 से हुई थी। हालांकि, पहला आधुनिक ओलिंपिक 1896 में ग्रीस के एथेंस में खेला गया था। इन गेम्स में भारत ने अपना 100 साल का सफर पूरा कर लिया है। देश ने पहली बार आधिकारिक टीम 1920 के ओलिंपिक में भेजी थी। यह गेम्स पहले वर्ल्ड वॉर के बाद बेल्जियम के एंटवर्प में हुए थे।

भारत ने अब तक 26 मेडल जीते हैं। इसमें 9 गोल्ड, 5 सिल्वर और 12 ब्रॉन्ज शामिल हैं। देश को हॉकी में 11 और शूटिंग में 4 पदक मिले हैं। इसके अलावा रेसलिंग में 5, बैडमिंटन-बॉक्सिंग में 2-2 और टेनिस-वेटलिफ्टिंग में 1-1 पदक जीता है।

1900 में ब्रिटिश मूल के पिचार्ड ने भारत की ओर से मेडल जीता था
वैसे तो 1900 के पेरिस ओलिंपिक में ब्रिटिश शासन वाले भारत की ओर से पहली बार नार्मन पिचार्ड गेम्स में शामिल हुए थे। उन्होंने 200 मीटर रेस और 200 मी. हर्डल्स रेस (बाधा दौड़) में दो रजत पदक जीते थे। कई इतिहासकार इस मेडल को भारत के खाते में नहीं गिनते, क्योंकि पिचार्ड ब्रिटिश मूल के थे। जबकि अंतरराष्ट्रीय ओलिंपिक समिति इसे भारत के खाते में गिनती है। हालांकि, आधिकारिक भारतीय टीम भेजने के लिहाज से देखा जाए तो भारत के 100 साल अब पूरे हुए हैं।

टोक्यो ओलिंपिक के लिए 100 से ज्यादा भारतीय एथलीट्स जाएंगे
अपने इस सफर में भारत अगले साल 23 जुलाई से 8 अगस्त तक होने वाले टोक्यो ओलिंपिक में पूरी तैयारी के साथ उतरने वाला है। यह गेम्स इसी साल होने थे, लेकिन कोरोनावायरस के कारण एक साल के लिए टाल दिए गए। भारत की ओर से 100 से ज्यादा खिलाड़ियों का दल टोक्यो भेजने की तैयारी है। इनमें से देश को बैडमिंटन, रेसलिंग, बॉक्सिंग और शूटिंग में मेडल मिल सकते हैं।

भारत ने अब तक 15 व्यक्तिगत ओलिंपिक मेडल जीते

खिलाड़ी मेडल खेल कब कहां
केडी जाधव ब्रॉन्ज रेसलिंग 1952 हेलसिंकी (फिनलैंंड)
लिएंंडर पेस ब्रॉन्ज टेनिस 1996 अटलांटा (जॉर्जिया)
कर्णम मल्लेश्वरी ब्रॉन्ज वेटलिफ्टिंग 2000 सिडनी (ऑस्ट्रेलिया)
राज्यवर्धन सिंह राठौड़ सिल्वर शूटिंग 2004 एथेंस (ग्रीस)
अभिनव बिंद्रा गोल्ड शूटिंग 2008 बीजिंग (चीन)
सुशील कुमार ब्रॉन्ज रेसलिंग 2008 बीजिंग (चीन)
विजेंदर सिंह ब्रॉन्ज बॉक्सिंग 2008 बीजिंग (चीन)
सुशील कुमार सिल्वर रेसलिंग 2012 लंदन (इंग्लैंड)
विजय कुमार सिल्वर शूटिंग 2012 लंदन (इंग्लैंड)
एमसी मैरीकॉम ब्रॉन्ज बॉक्सिंग 2012 लंदन (इंग्लैंड)
साइना नेहवाल ब्रॉन्ज बैडमिंटन 2012 लंदन (इंग्लैंड)
योगेश्वर दत्त ब्रॉन्ज रेसलिंंग 2012 लंदन (इंग्लैंड)
गगन नारंंग ब्रॉन्ज शूटिंग 2012 लंदन (इंग्लैंड)
पीवी सिंधु सिल्वर बैडमिंटन 2016 रियो (ब्राजील)
साक्षी मलिक ब्रॉन्ज रेसलिंग 2016 रियो (ब्राजील)
  • इन 5 बड़ी कामयाबियों ने भारतीय खेल को बदला
भारत को ओलिंपिक में पहला मेडल हॉकी टीम ने दिलाया। टीम ने 1928 के गेम्स में गोल्ड जीता था।

शुरुआत के दो ओलिंपिक 1920 और 1924 में खाली हाथ रहने के बाद भारत ने 1928 में पदक का खाता खोला था, वह भी सीधे गोल्ड के साथ। देश को यह पहला पदक हॉकी ने दिलाया। इस कामयाबी का असर यह हुआ कि हॉकी में भारत ने 1956 तक लगातार 6 गोल्ड जीते। 1960 में सिल्वर, 1964 में गोल्ड, 1968 और 1972 में ब्रॉन्ज के बाद 1980 में 8वां गोल्ड जीता। आजादी के बाद देश का राष्ट्रीय खेल हॉकी ही रहा है। देश का बच्चा-बच्चा हॉकी खेलता था।

1980 में भारत को हॉकी में 8वां गोल्ड मिला, इसके बाद 1983 में क्रिकेट में वनडे वर्ल्ड कप जीतने के साथ ही ज्यादातर लोगों का झुकाव हॉकी से हटने लगा। यही कारण है कि 1980 के बाद भारत को इस खेल में कोई ओलिंपिक मेडल नहीं मिला। अब टोक्यो ओलिंपिक में भारत गोल्ड की प्रबल दावेदार है। आज वर्ल्ड रैंकिंग में हॉकी टीम चौथे नंबर पर काबिज है।

1952 हेलसिंंकी ओलिंपिक में केडी जाधव ने रेसलिंग में पहला व्यक्तिगत मेडल दिलाया था।

भारत को दूसरी सबसे बड़ी सफलता 1952 हेलसिंकी (फिनलैंड) में मिली। इस साल हॉकी में गोल्ड के अलावा देश को पहली बार व्यक्तिगत इवेंट में पदक मिला। रेसलर कासाबा दादासाहेब जाधव ने फ्रीस्टाइल के 57 किग्रा इवेंट में ब्रॉन्ज दिलाया। इसका असर यह हुआ कि सुशील कुमार समेत एक से बढ़कर एक रेसलर सामने आए।

रेसलिंग में सुशील ने 2008 बीजिंग ओलिंपिक में ब्रॉन्ज और 2012 लंदन गेम्स में सिल्वर जीता था। इनके अलावा लंदन में योगेश्वर दत्त और 2016 रियो ओलिंपिक में साक्षी मलिक ने ब्रॉन्ज जीता था। साक्षी ओलिंपिक मेडल जीतने वाली देश की पहली महिला रेसलर हैं। अब टोक्यो ओलिंपिक में बजरंग पुनिया, दीपक पुनिया और विनेश फोगाट पर नजर रहेगी।

लिएंडर पेस ने टेनिस में मेडल दिलाया।

1996 को अटलांटा ओलिंपिक में लिएंडर पेस ने भारत के लिए टेनिस में कांस्य जीता था। भारतीय टेनिस में यह नए युग की शुरुआत थी। इस कामयाबी के बाद भारत को सानिया मिर्जा, महेश भूपति जैसे स्टार मिले। पेस ने डबल्स और मिक्स्ड डबल्स में 18 ग्रैंड स्लैम खिताब जीते हैं। उन्हें 1996-97 में राजीव गांधी खेल रत्न अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था। हालांकि, देश के टेनिस में दूसरा ओलिंपिक पदक नहीं मिल सका, लेकिन इसकी उम्मीद अभी भी बरकरार है।

मौजूदा रैंकिंग के आधार पर टोक्यो ओलिंपिक में रोहन बोपन्ना और दिविज शरण की भारतीय जोड़ी खेल सकती है। भारत की ये जोड़ी अब तक हर बार सफल रही है। इन दोनों ने 2018 एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल भी जीता था। वहीं, महिलाओं में सानिया मिर्जा और अंकिता रैना की जोड़ी के खेलने की संभावना भी ज्यादा है।

देश के लिए महिलाओं में पहला मेडल वेटलिफ्टर मल्लेश्वरी ने जीता।

ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में हुआ 2000 का ओलिंपिक भारतीय महिला एथलीट्स के लिए सबसे खास रहा था। इसमें भारत के लिए महिलाओं में पहला पदक कर्णम मल्लेश्वरी ने वेटलिफ्टिंग में जीता था। हालांकि, अब तक वेटलिफ्टिंग में दूसरा पदक नहीं मिल सका है, लेकिन मल्लेश्वरी के बाद 4 महिला खिलाड़ियों ने देश को मेडल दिलाया है। इनमें मैरीकॉम, साइना नेहवाल, पीवी सिंधु और साक्षी मलिक शामिल हैं।

शूटर अभिनव बिंद्रा ने देश को पहला व्यक्तिगत गोल्ड दिलाया।

2008 बीजिंग ओलिंपिक में शूटर अभिनव बिंद्रा ने देश को पहला और एकमात्र व्यक्तिगत गोल्ड दिलाया। इससे पहले भारत को सिर्फ हॉकी टीम ने ही 8 गोल्ड दिलाए थे। इस कामयाबी का क्रेडिट 2004 के एथेंस गेम्स में शूटर राज्यवर्धन सिंह राठौड़ को मिली सफलता को दे सकते हैं। तब राज्यवर्धन ने देश को पहला व्यक्तिगत सिल्वर मेडल दिलाया था।

इसके बाद शूटिंग में अभिनव, गगन नारंग और अब मनु भाकर जैसे कई शानदार खिलाड़ी सामने आए। शूटिंग से अब टोक्यो ओलिंपिक में सबसे ज्यादा मेडल जीतने की उम्मीदें भी लगी हैं।



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