Corruption and match fixing in indian cricket| International Cricket Council ACU said, We have 50 investigations that we are undertaking and majority have links to corruptors in India | आईसीसी ने कहा- 50 मामलों में से ज्यादातर के तार भारत से जुड़े, बीसीसीआई अधिकारी बोले- हर साल सट्टेबाजी से 40 हजार करोड़ रु. की अवैध कमाई होती है

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Corruption and match fixing in indian cricket| International Cricket Council ACU said, We have 50 investigations that we are undertaking and majority have links to corruptors in India | आईसीसी ने कहा- 50 मामलों में से ज्यादातर के तार भारत से जुड़े, बीसीसीआई अधिकारी बोले- हर साल सट्टेबाजी से 40 हजार करोड़ रु. की अवैध कमाई होती है


  • आईसीसी अधिकारी ने कहा- मैं भारतीय एजेंसियों को ऐसे 8 नाम दे सकता हूं, जो खिलाड़ियों को पैसा देकर फंसाने की कोशिश कर रहे
  • बीसीसीआई की एंटी करप्शन यूनिट के हेड बोले- प्रिवेंशन ऑफ स्पोर्ट्स फ्रॉड बिल कानून बनता है, तो इससे भ्रष्टाचार रोकने में मदद मिलेगी

दैनिक भास्कर

Jun 21, 2020, 02:35 PM IST

इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (आईसीसी) का मानना है कि भारतीय क्रिकेट में फिक्सिंग और भ्रष्टाचार की जड़ें बहुत गहरी हैं। अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि आईसीसी फिक्सिंग से जुड़े जिन 50 मामलों की अभी जांच कर रही है, उनमें से ज्यादातर के तार भारत से जुड़े हैं।

वहीं, बीसीसीआई के एंटी करप्शन यूनिट के हेड अजित सिंह कहना है कि हर साल सट्टेबाजी से 40 हजार करोड़ रुपए की अवैध कमाई होती है। आईसीसी की एंटी करप्शन यूनिट से जुड़े एक अधिकारी ने स्पोर्ट्स लॉ और पॉलिसी से जुड़े वेबिनार में यह खुलासा किया। 

भारतीय क्रिकेट में भ्रष्टाचार कम नहीं हुआ: आईसीसी

आईसीसी के एसीयू यूनिट के अधिकारी स्टीव रिचर्ड्सन के मुताबिक, 2013 के आईपीएल में स्पॉट फिक्सिंग के खुलासे के बाद यह लगा था कि भारतीय क्रिकेट में करप्शन कम होगा। लेकिन ताजा रिपोर्ट कुछ और हकीकत बता रही है।

सट्टेबाज खिलाड़ियों से सम्पर्क साधने की कोशिश कर रहे

रिचर्ड्सन ने आगे कहा, ‘‘खिलाड़ी चेन का आखिरी हिस्सा होते हैं। मुश्किल यह है कि जो इस पूरे धंधे को चलाते हैं वह मैदान के बाहर बैठते हैं। मैं बीसीसीआई और भारतीय जांच एजेंसियों को ऐसे 8 नाम दे सकता हूं, जो खिलाड़ियों को पैसा देकर उन्हें फंसाने की कोशिश कर रहे हैं।’’

उन्होंने आगे कहा कि भले ही अब तक किसी हाई प्रोफाइल भारतीय क्रिकेटर का नाम जांच में सामने नहीं आया है, लेकिन खिलाड़ी और सट्टेबाजी का गठजोड़ बना हुआ है। 

कर्नाटक प्रीमियर लीग की भी जांच चल रही

पिछले साल कर्नाटक प्रीमियर लीग (केपीएल) में कई लोगों पर फिक्सिंग से जुड़े आरोप लगाए गए थे, जिसमें खिलाड़ियों के साथ-साथ टीम मालिक भी शामिल थे। बोर्ड की एसीयू यूनिट के प्रमुख अजीत सिंह ने कहा कि इन लोगों के खिलाफ पुलिस ने चार्जशीट दायर की है।

30 से 40 हजार करोड़ की अवैध कमाई होती है

उन्होंने बताया कि यह पूरा धंधा सट्टेबाजी से होने वाली अवैध कमाई पर टिका है। जल्दी पैसा कमाने के चक्कर में सट्टेबाज खिलाड़ियों, सपोर्ट स्टाफ, ऑफिशियल्स और फ्रेंचाइजी मालिकों से संपर्क करते हैं। हर साल सट्टेबाजी के जरिए 30 से 40 हजार करोड़ रुपए की कमाई होती है। कई स्टेट क्रिकेट लीग की जांच के दौरान यह पता चला कि कुछ मैचों में यह रकम करीब 19 करोड़ तक थी। 

कड़े कानून से ही क्रिकेट में करप्शन रूकेगा

आईसीसी का मानना है भारत में क्रिकेट में भ्रष्टाचार पर तभी रोक लगाई जा सकेगी, जब तक यहां फिक्सिंग को कानून के मुताबिक अपराध घोषित नहीं किया जाता। रिचर्डसन ने कहा, ‘‘मैच फिक्सिंग के खिलाफ कानून लाने वाला पहला देश श्रीलंका था, इसलिए वहां क्रिकेट सुरक्षित है। वहीं, ऑस्ट्रेलिया में चीजे काफी बेहतर हैं। हालांकि, भारत में ऐसा कोई कानून नहीं, जिसके कारण बीसीसीआई भारत में खुलकर काम नहीं कर पाती है।’’

भारत में कानून में बदलाव गेमचेंजर साबित होगा 

ऑस्ट्रेलिया के कानून के मुताबिक, वह फिक्सिंग में शामिल होने के शक में किसी को भी बड़े टूर्नामेंट से पहले किसी भी व्यक्ति को अपने देश में आने से रोक सकते हैं। भारत में भी 2021 में टी-20 वर्ल्ड कप और 2023 वनडे वर्ल्ड कप होने वाला है, ऐसे में कानून में बदलाव गेमचेंजर साबित हो सकता है। 

सिंह ने इसे लेकर कहा कि अगर प्रिवेंशन ऑफ स्पोर्ट्स फ्रॉड बिल कानून बन जाता है तो इससे भ्रष्टाचार और फिक्सिंग को रोकने में काफी हद तक मदद मिलेगी। 



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